Protest in Paris to ensure Pakistan gets placed on FATF blacklist | Paris में Pakistan के सताए पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, FATF की ब्लैकलिस्ट में डालने के मांग

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पेरिस: पाकिस्तान (Pakistan) पर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (Financial Action Task Force-FATF) की तलवार लटक रही है. माना जा रहा है कि आतंकी गतिविधियों का समर्थन करने के लिए पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में बना रह सकता है. इतना ही नहीं, उसे ब्लैक लिस्ट में भी डाला जा सकता है. भारत (India) सहित कई देश चाहते हैं कि आतंकवाद का गढ़ बन चुके पाकिस्तान पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. वहीं, निर्वासित पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इमरान खान (Imran Khan) के ‘नए पाकिस्तान’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.  

टूट जाएगी Pak की कमर

पेरिस में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के मुख्यालय के बाहर मंगलवार को बड़ी संख्या में निर्वासित पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता और वीगर समुदाय के लोगों (Exiled journalists, human rights activists, and Uyghurs) ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि FATF पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट करे, ताकि उसे अपने किए की सजा मिल सके. ब्लैकलिस्ट होने का अर्थ होगा पहले से बदहाल पाकिस्तान की आर्थिक कमर टूट जाना. ऐसी स्थिति में कोई भी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान पाकिस्तान को आर्थिक मदद नहीं करेगा.

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यह है Protest का मकसद

प्रदर्शन कर रहे निर्वासित पाकिस्तानी पत्रकार और साउथ एशिया प्रेस के संपादक ताहा सिद्दीकी (Taha Siddiqui) ने कहा कि हम चाहते हैं कि पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट किया जाए. इस प्रदर्शन का मकसद बलूचिस्तान, पश्तून क्षेत्रों, तिब्बत, हांगकांग और वीगर समुदाय के असंतुष्ट लोगों को एकजुट करके संयुक्त मोर्चा बनाना है, ताकि पाकिस्तान और चीन की करतूतों से दुनिया को अवगत कराया जा सके. वहीं, साउथ ऐसा प्रेस ने ट्वीट करके कहा है कि पाकिस्तान को पाकिस्तान को आतंकवादी संगठनों और आतंक के वित्तपोषण के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. हम FATF से आग्रह करते हैं कि वो चीन के दबाव में न आए.

हत्यारे रिहा, बेकसूर जेल में

पश्तून राइट्स एक्टिविस्ट फजल रहमान अफरीदी (Fazal Rehman Afridi) ने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ध्यान देने की जरूरत है कि पत्रकार डेनियल पर्ल के हत्यारे को पाकिस्तान की अदालत ने रिहा कर दिया. जबकि मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले पाकिस्तान की जेलों में दम तोड़ रहे हैं. यह पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को दर्शाता है. पाकिस्तानी सरकार को दुनिया से जो कहती है, उसका एकदम उल्टा करती है’. अफरीदी ने कहा कि पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था भी सेना की तरफ झुकाव रखती है और उसी के अनुरूप फैसले सुनाती है.

Army ढा रही जुल्म

फजल रहमान अफरीदी ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि पाकिस्तान सरकार आतंकवाद का समर्थन करती है, वहां की सेना मानवाधिकारों को अपने पैरों तले कुचल रही है. सेना मानवाधिकारों के उल्लंघन के साथ ही युद्ध अपराधों में भी शामिल है और इसके लिए उसे जवाबदेह बनाया जाना चाहिए. हम मांग करते हैं कि एफएटीएफ पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करे. ताकि उसे उसके किये की सजा मिल सके.

 



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