Pfizer said its vaccine candidate BNT162b2 demonstrated 95% efficacy beginning 28 days after the first dose | फाइजर की कोरोना वैक्सीन फाइनल ट्रायल में 95% तक असरदार, इसी साल 5 करोड़ डोज बनाने की तैयारी

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नई दिल्ली13 मिनट पहले

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वैक्सीन बनाने वाली कंपनी फाइजर ने कहा कि ट्रायल के दौरान उसकी वैक्सीन के कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं दिखे।

फार्मा कंपनी फाइजर की कोरोना वैक्सीन फेज-3 ट्रायल में 95% असरदार रही है। कंपनी के मुताबिक, वैक्सीन उम्रदराज लोगों पर भी कारगर रही। इसके कोई सीरियस साइड इफेक्ट भी नहीं दिखे। फाइजर ने बुधवार को कहा कि अब कंपनी कुछ दिनों में ही रेगुलेटरी अप्रूवल के लिए आवेदन करेगी। इसी साल वैक्सीन के 5 करोड़ डोज बनाने की तैयारी है।

फाइजर ने अपनी स्टडी में कोविड-19 के 170 केस शामिल किए थे। वॉलंटियर्स को पहली डोज दिए जाने के 28 दिन बाद इसे कोरोना से बचाव में 95% असरदार पाया गया। कंपनी का कहना है कि इस कामयाबी के साथ ही उसने यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (USFDA) की तरफ से तय इमरजेंसी इस्तेमाल के स्टेंडर्ड हासिल कर लिया है।

फाइजर की वैक्सीन के साथ एक अच्छी बात यह रही कि वैक्सीन को लेकर कोई सेफ्टी कंसर्न सामने नहीं आया। फाइजर और बायोएनटेक ने अपनी कोविड-19 वैक्सीन के लिए जुलाई में लेट-स्टेज क्लिनिकल ट्रायल्स शुरू किए थे। इसमें 44 हजार लोगों को शामिल किया गया था। इस वैक्सीन को हाई-रिस्क आबादी के लिए इस साल के अंत तक अप्रूवल दिया जा सकता है।

क्या फाइजर का वैक्सीन सेफ है?

  • फाइजर और बायोएनटेक ने अब तक अपनी वैक्सीन की सेफ्टी को लेकर कोई चिंता नहीं जताई है। लार्ज-स्केल स्टडी से पहले कंपनियों ने मई में छोटे स्तर पर क्लिनिकल ट्रायल किए थे। इसमें उन्होंने वैक्सीन के चार वर्जन आजमाए और जिसके बुखार या थकान जैसे साइड इफेक्ट सबसे कम या मध्यम स्तर के थे, उसे चुना गया। अगर इस वैक्सीन को FDA से इमरजेंसी अप्रूवल मिला तो लाखों लोग इसका फायदा उठा सकेंगे। आगे की निगरानी सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (CDC) और FDA मिलकर करेंगे। ट्रायल में शामिल लोगों की दो साल तक निगरानी होगी।

फाइजर का वैक्सीन मार्केट में कब आएगा?

  • फाइजर ने कहा है कि नवंबर के तीसरे हफ्ते में इमरजेंसी अप्रूवल के लिए वह FDA के पास जाएगी। तब तक उसके पास दो महीने का सेफ्टी डेटा उपलब्ध होगा। इसके बाद एजेंसी विशेषज्ञों की एक्सटर्नल एडवायजरी कमेटी से परामर्श लेगी। वैक्सीन के सेफ्टी, इफेक्टिवनेस के विस्तृत डेटा की स्टडी में कुछ हफ्ते भी लग सकते हैं। यह भी देखा जाएगा कि कंपनियां सुरक्षित तरीके से लाखों डोज बना सकती हैं या नहीं।
  • इस वैक्सीन को हाई-रिस्क आबादी के लिए इस साल के अंत तक अप्रूवल दिया जा सकता है। यह तभी होगा जब सबकुछ प्लानिंग के हिसाब से चले और कोई अनपेक्षित घटना न घटे। फाइजर और बायोएनटेक का कहना है कि वे 1.3 अरब डोज हर साल बना सकते हैं। लेकिन, यह दुनियाभर की जरूरत से कम है।

भारत में वैक्सीन के ट्रायल्स की क्या स्थिति है?

  • भारत में इस समय भारत बायोटेक के कोवैक्सिन और ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका की कोवीशील्ड वैक्सीन के फेज-3 ट्रायल्स चल रहे हैं। इसके शुरुआती नतीजे दिसंबर-जनवरी में आने के संकेत मिल रहे हैं। यदि सबकुछ प्लान के मुताबिक हुआ तो अगले साल की शुरुआत तक यह वैक्सीन अप्रूव हो जाएंगी। जायडस कैडिला की बनाई वैक्सीन को लेकर भी अब तक अच्छे शुरुआती नतीजे आए हैं। इसके भी फेज-3 ट्रायल्स शुरू होने वाले हैं।

दुनियाभर में 212 वैक्सीन पर काम जारी

विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोविड-19 वैक्सीन लैंडस्केप के मुताबिक, इस समय दुनियाभर 212 वैक्सीन पर काम चल रहा है। इसमें भी 48 वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल्स में हैं और इसमें 11 वैक्सीन अंतिम स्टेज में यानी लार्ज-स्केल ट्रायल्स से गुजर रहे हैं।

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