Jacinda Ardern; All You Need To Know Abut New Zealand Government Climate Emergency Bill | न्यूजीलैंड सरकार ने क्लाइमेट इमरजेंसी का ऐलान किया, 2025 तक सरकारी उपक्रम कार्बन न्यूट्रल होंगे

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ऑकलैंड5 घंटे पहले

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बुधवार को न्यूजीलैंड की संसद में क्लाइमेट इमरजेंसी बिल पास होने के बाद प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न और उनके सहयोगी मंत्री।

न्यूजीलैंड की संसद ने बुधवार को क्लाइमेट इमरजेंसी बिल पास कर दिया। अक्टूबर में दोबारा सत्ता संभालने वाली प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने यह ऐलान किया। इसके मुताबिक, देश के सभी सरकारी विभागों और इंस्टीट्यूशन्स को साल 2025 तक कार्बन न्यूट्रल किया जाएगा। यानी यहां कार्बन उत्सर्जन नहीं होगा।

दुनिया में करीब 30 देशों ने क्लाइमेट इमरजेंसी का ऐलान किया है। इनमें ब्रिटेन, कनाडा और फ्रांस भी शामिल हैं। न्यूजीलैंड इस कड़ी में सबसे नया सदस्य है।

पब्लिक सेक्टर को तवज्जो
न्यूजीलैंड सरकार ने जो क्लाइमेट इमरजेंसी डिक्लेयर की है। उसमें सबसे पहले सरकारी विभागों को कार्बन न्यूट्रल किया जाना है। पीएम जेसिंडा के मुताबिक- यह बिल ग्लोबल वार्मिंग के एवरेज लेवल को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक रखने के लक्ष्य में मददगार साबित होगा। सबसे पहले सरकारी विभागों को इसके तहत लाया जाएगा। इन्हें 2025 तक कार्बन न्यूट्रल बनाया जाएगा। यह आने वाली पीढ़ी को बेहतर जलवायु देने में मददगार साबित होगा।

विरोध भी हुआ
बुधवार को संसद में जब इस बिल पर बहस हुई तो इसका विरोध भी हुआ। विरोधी दल नेशनल पार्टी ने विधेयक के खिलाफ मतदान किया। उनका कहना था कि सरकार सिर्फ दिखावा कर रही है। क्योंकि, इसके लिए न तो फंड अलॉट किया गया है और न पहले से कोई तैयारियां की गई हैं।

चुनावी वादा
अर्डर्न ने अक्टूबर में सत्ता में वापसी की है और क्लाइमेट इमरजेंसी बिल उनके चुनावी एजेंडे में शामिल था। एक चुनावी रैली में उन्होंने इसे सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुए कहा था- यह हमारी पीढ़ी के लिए न्यूक्लियर फ्री वर्ल्ड जैसा कॉन्सेप्ट है। अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने जीरो कार्बन बिल पेश किया था। इसमें वादा किया गया था कि देश 2050 तक कार्बन मुक्त हो जाएगा। ऑयल और गैस एक्सप्लोरेशन पर रोक लगाई जाएगी।

2 करोड़ डॉलर खर्च होंगे
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अगर न्यूजीलैंड सरकार इस वादे को पूरी तरह लागू करती है तो इस पर करीब 2 करोड़ डॉलर खर्च होंगे। इलेक्ट्रिक कार और हायब्रिड व्हीकल्स खरीदने होंगे। इसके अलावा तमाम सरकारी दफ्तरों और दूसरी बिल्डिंगों को ग्रीन एनर्जी से लैस करना होगा। पॉलिसीज बनाने से ज्यादा इन्हें लागू करना चुनौती होगी।

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