India may come out of recession early next year growth rate may be 0 point 5pc in March quarter | भारत अगले साल के शुरू में मंदी से बाहर निकल सकता है, मार्च तिमाही में 0.5% रह सकती है विकास दर

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नई दिल्ली12 घंटे पहले

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जुलाई-सितंबर तिमाही में GDP 8.8% और अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 3% गिर सकती है, इन दोनों तिमाहियों के लिए अर्थशास्त्रियों ने पहले क्रमश: 10.4% और 5% गिरावट का अनुमान दिया था

  • अर्थशास्त्रियों ने कोविड-19 वैक्सीन की प्रगति को देखते हुए अपने अनुमान में सुधार किया है
  • जुलाई-सितंबर तिमाही के जीडीपी आंकड़े सरकार शुक्रवार को जारी करने वाली है

भारतीय अर्थव्यवस्था अगले साल जनवरी-मार्च तिमाही में मंदी से बाहर निकल सकती है, हालांकि उस समय विकास दर महज 0.5 फीसदी ही रह सकती है। यह बात रायटर्स द्वारा अर्थशास्त्रियों के बीच कराए गए एक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में कही गई। 40 में से 26 अर्थशास्त्रियों ने कहा कि कोविड-19 वैक्सीन की प्रगति को देखते हुए उन्हेंने अपने अनुमान में सुधार किया है।

18-25 नवंबर के बीच किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी में 8.8 फीसदी और अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 3 फीसदी की गिरावट रह सकती है। इन दोनों तिमाहियों के लिए अर्थशास्त्रियों ने पहले क्रमश: 10.4 फीसदी और 5 फीसदी गिरावट का अनुमान दिया था। जुलाई-सितंबर तिमाही के जीडीपी आंकड़े सरकार शुक्रवार को जारी करने वाली है।

फेस्टीव सीजन की मांग ने भी अर्थशास्त्रियों में उम्मीद जगाई

वैक्सीन को लेकर हाल में आई खबरों के कारण शेयर बाजार के इंडेक्स लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद जगी है। फेस्टीव सीजन की मांग ने भी पिछले महीने महीने अर्थशास्त्रियों में उम्मीद जगाई है।

कोविड-19 के आंकड़ों में सुधार से ज्यादा बड़े स्तर पर लॉकडाउन की जरूरत नहीं दिख रही

मोर्गन स्टेनली की चीफ इंडिया इकॉनोमिस्ट उपासना चाचरा ने कहा कि कोविड-19 के आंकड़ों में सुधार दिख रहा है और ज्यादा बड़े स्तर पर लॉकडाउन की जरूरत नहीं दिख रही है। इसलिए रिकवरी में तेजी आने की उम्मीद है। मार्च तिमाही में वैक्सीन आ जाने की उम्मीद है और इससे अर्थव्यवस्था खुलने की रफ्तार बढ़ेगी।

इस कारोबारी साल में GDP में 8.7% गिरावट रही सकती है

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक जनवरी-मार्च तिमाही में जहां GDP में महज 0.5 फीसदी विकास हो सकता है, वहीं इस कारोबारी साल में GDP में 8.7 फीसदी गिरावट रही सकती है। गत 4 दशकों में देश की अर्थव्यवस्था में पूरे कारोबारी साल में पहली बार गिरावट दर्ज होने की आशंका है। अर्थशास्त्रियों ने अगले कारोबारी साल में देश की विकास दर 9 फीसदी और 2022-23 में 5.8 फीसदी रहने की उम्मीद जताई, लेकिन कहा कि अर्थव्यवस्था जल्द कोरोनावायरस महामारी से पहले वाले स्तर पर नहीं पहुंचने वाली है।

6% से ज्यादा खुदरा महंगाई का अनुमान

अर्थशास्त्रियों ने कहा कि इस कारोबारी साल में औसत खुदरा महंगाई दर 6 फीसदी से ज्यादा रह सकती है। सरकार ने RBI को खुदरा महंगाई दर 2-6 फीसदी के बीच बनाए रखने की जिम्मेदारी दी है। एक साल से ज्यादा समय से खुदरा महंगाई दर 4 फीसदी से ज्यादा चल रही है।

RBI जून तिमाही में अगली बार घटा सकता है रेपो रेट

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक कम विकास दर और ऊंची महंगाई का ट्रेंड एक तिमाही से लेकर एक साल तक बना रह सकता है। इसलिए उन्होंने RBI की मुख्य ब्याज दर में अगली कटौती के अनुमान को मार्च तिमाही से आगे बढ़ाकर जून तिमाही तक कर दिया। सर्वेक्षण के मुताबिक जून तिमाही में रेपो रेट 25 फीसदी घटकर 3.75 फीसदी किया जा सकता है।

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