e Trump administration is planning to tighten sanctions on Iran says, US Special envoy | White House छोड़ने से पहले इस देश पर कड़ा प्रतिबंध लगाएंगे ट्रंप, बाइडेन से की ये अपील

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नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में सत्ता का भरपूर प्रयोग कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि वे अपने अंतिम माह में ईरान पर प्रतिबंध लगाएंगे. इस बात के संकेत अमेरिका के विशेष राजदूत ने एक इवेंट के दौरान दिए हैं. ईरान के लिए अमेरिकी विशेष दूत इलिओट एब्रेम्स ने बुधवार को वर्चुअल बेरुत इंस्टीट्यूट इवेंट में बताया कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन आगे तेहरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने की प्लानिंग कर रहा है. एब्रेम्स ने जानकारी दी है कि अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में ट्रंप तेहरान पर लगने वाले प्रतिबंध हथियारों, सामूहिक विनाश के हथियारों और मानव अधिकारों से संबंधित होंगे.

परमाणू हमले को टालने के लिए जरूरी है प्रतिबंध
इलिओट एब्रेम्स ने अमेरिका के अगले राष्ट्रपति जो बाइडेन से आग्रह किया है कि वे क्षेत्रीय संतुलन और परमाणु हमले के खतरों को टालने के लिए ईरान पर अब तक की जा रही सख्ती बरकरार रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि जो बाइडेन के नए विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को यह देखना जरूरी है कि 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा से ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते में कहां गलती हुई.

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20 जनवरी को शपथ लेंगे जो बाइडेन
मालूम हो कि 20 जनवरी को शपथ लेने जा रहे नए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि वह ईरान के साथ बराक ओबामा के समय पर किए गए समझौते पर वापस लौटेंगे, जिसे दो साल पहले मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने छोड़ दिया है. बेरूत इंस्टीट्यूट के एक वर्चुअल कार्यक्रम में बोलते हुए अमेरिका के विशेष दूत इलिओट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन तेहरान पर परमाणु कार्यक्रम के संबंध में और दबाव बनाने जा रहा है. यह सख्ती हथियारों के साथ ही मानवाधिकारों से संबंधित होगी. हमारे पास इसके लिए एक हफ्ता या दो हफ्ता नहीं दिसंबर और जनवरी का महीना भी है.

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ईरान के सुप्रीम नेता को ब्लैक लिस्ट कर चुका अमेरिका
बीते हफ्ते ईरान पर दबाव बनाने के अमेरिका ने उसके खिलाफ प्रतिबंध लगाए थे. इस दौरान देश के सुप्रीम नेता आयातुल्ला अली खामनेई के फाउंडेशन को काली सूची में डाल दिया था. खामनेई  द्वारा नियंत्रित फाउंडेशन ऑफ ऑप्रेस्ड, फाउंडेशन से जुड़ी 50 कंपनियों और 10 व्यक्तियों को ब्लैक लिस्ट कर दिया था. इनमें वित्तीय सेवा, खनन और ऊर्जा से जुड़ी कंपनियां हैं.

 

 



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