Dr. Houghton said – Even after vaccination, the immune system will have to be strengthened, we do not know how powerful the virus will be. | डॉ. हौटन ने कहा- वैक्सीन लगने के बाद भी इम्यून सिस्टम मजबूत करना होगा, हम नहीं जानते वायरस कितना शक्तिशाली होगा

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एक दिन पहले

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नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. माइकल हौटन का कहना है कि हमें इम्यून सिस्टम मजबूत करना होगा, क्योंकि हम नहीं जान सकते कि अगला वायरस किस किस्म का और कितना ताकतवर होगा। - Dainik Bhaskar

नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. माइकल हौटन का कहना है कि हमें इम्यून सिस्टम मजबूत करना होगा, क्योंकि हम नहीं जान सकते कि अगला वायरस किस किस्म का और कितना ताकतवर होगा।

  • 2020 में मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार पाने वाले तीन वैज्ञानिकों में शामिल रहे हैं डॉ. हौटन

कोरोना वायरस नई शक्ल अख्तियार कर रहा है, इसलिए सावधानी की जरूरत है। सबसे पहले तो सभी को वैक्सीन लगानी पड़ेगी। इसके बाद हर साल बूस्टर देना होगा, तब जाकर वायरस से सुरक्षा हो पाएगी। 2020 में मेडिसिन के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. माइकल हौटन का कहना है कि इसके बाद भी हमें इम्यून सिस्टम मजबूत करना होगा क्योंकि हम नहीं जान सकते कि अगला वायरस किस किस्म का और कितना ताकतवर होगा। वर्ल्ड हेल्थ डे पर रितेश शुक्ल से उन्होंने खास बातचीत की, पढ़िए प्रमुख अंश…

‘कम से कम सालभर तक दुनिया में सभी को सोशल डिस्टेंसिंग रखनी होगी और मास्क को तो जीवन का हिस्सा बनाना होगा। यह वायरस सांस के जरिए प्रवेश करता है, इसलिए हवा को छानते रहना जरूरी है। वैक्सीन तो ठीक है, पर वायरस भी नई शक्ल अख्तियार कर रहा है, इसलिए सावधानी रखने की जरूरत है। वैक्सीनेशन के बाद हर साल बूस्टर लगाना पड़ेगा, तब कहीं सुरक्षा हो पाएगी। कोरोना पर जीत पाने में दो साल लग सकते हैं। इसके बाद भी हमें अपना प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत रखना होगा, ताकि आने वाले नई महामारियों से लड़ सकें।

इन्फ्लुएंजा वायरस के कारण इस स्तर की बीमारी हमें फिर झेलनी पड़ सकती है। 1918 में स्पैनिश फ्लू के कारण 2 करोड़ जानें गई थीं। और ये इन्फ्लुएंजा वायरस का एक क्लासिक उदाहरण है। हम पर वायरस का आक्रमण कभी भी हो सकता है। वायरस अक्सर पक्षियों या जानवरों में पाया जाता है। उन बाजारों में एहतियात रखनी होगी, जहां जानवरों को बेचा-खरीदा जाता है। वुहान में कोरोना का प्रसार इसी तरह हुआ था। एक बड़ा खतरा क्लाइमेट चेंज भी है।

पर्माफ्रॉस्ट के घटने से करोड़ों वायरस सक्रिय हो जाएंगे, जो बर्फ के नीचे जमीन में दफन हैं। मैं अब भी जीते-जागते वायरस को ज्यादा खतरनाक मानता हूं, पर हम क्लाइमेट चेंज को नजरअंदाज नहीं कर सकते। क्लाइमेट चेंज का भी जल्द तोड़ निकालना होगा। इसमें विज्ञान की मदद लेनी होगी। अगर विज्ञान को ही नहीं मानेंगे, तो फिर हमें बीमारी और तबाही के लिए तैयार रहना चाहिए। कोरोना ने दुनिया को कई अच्छे सबक भी सिखाए हैं। पहला सबक- वायरस सच्चाई है और बहुत खतरनाक हो सकता है।

इसलिए हमें प्रकृति और अपनी सेहत को लेकर अलर्ट रहने की जरूरत है। इसके अलावा वायरस रिसर्च को हलके में नहीं ले सकते, इसलिए इस क्षेत्र में श्रम और पूंजी का निवेश लगातार करते रहना होगा। जब भी महामारी आए, हमें न सिर्फ वैक्सीन बनानी होंगी, बल्कि उनका भंडारण भी करना होगा। सॉर्स 2003 में फैला था। वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया भी काफी आगे जा चुकी थी। पर महामारी जल्द खत्म हो गई इसलिए वैक्सीन पर हो रहा काम बीच में ही छोड़ दिया गया। अगर हमने वैक्सीन स्टोर की होती, तो आज कोरोना से लड़ने में आसानी हुई होती।

भारत के जैसी वैक्सीन बनाने की काबिलियत हर देश को अर्जित करनी होगी
डॉक्टर हौटन के मुताबिक, ‘भारत की तरह हर देश को वैक्सीन बनाने की काबिलियत अर्जित करनी होगी। ताकि मुश्किल दौर में उन्हें दूसरे देशों पर निर्भर न रहना पड़े। वैसे भी जब तक जीवन है, तब तक खतरे हैं। अनुभवों से सबक लेते रहेंगे तो खतरे मैनेज किए जा सकते हैं। साथ ही ऐसे खेल खेलें जिसमें मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन संभव हो। ऐसे खेल देखने से मानसिक तनाव दूर होता है और अगर खेलें तो शरीर भी चुस्त रहेगा।’

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