Coding gives opportunity to earn 55 dollars every hour, learn the advantages of coding for career and easy ways to learn it | 55 डॉलर्स हर घंटा कमाने का मौका देती है कोडिंग,जानें करिअर के लिए कोडिंग के फायदें और इसे सीखने के आसान तरीके

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15 मिनट पहले

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  • लिंक्डइन के मुताबिक पिछले दशक में 650% बढ़े डाटा साइंस से जुड़े रोल्स
  • 37% बढ़ोतरी हर साल दर्ज होगी डाटा साइंस स्किल्स की मांग में

कोडिंग इंडस्ट्री के लिए नई नहीं है और पिछले कुछ समय से इसके चलते टेक्नोलॉजी में आए बदलावों ने प्लेसमेंट सेक्टर में एक हाइब्रिड अप्रोच को जन्म दिया है। इसे देखते हुए युवा प्रोफेशनल के लिए जरूरी हो गया है कि वह अपने करियर के रोडमैप पर फिर से गौर करें और देखें कि इस सेक्टर में कौन से नए रोल्स ऑफर किए जा रहे हैं। अब कोडिंग की आईटी के अलावा डेटा एनालिटिक्स, डिजाइन, मार्केटिंग, बिजनेस, इंजीनियरिंग और साइंस की फील्ड में अहम भूमिका है। indeed.com की हाल में आई एक स्टडी के मुताबिक 2020 में सबसे ज्यादा मांग रहने वाली स्किल कोडिंग है। तेजी से बदलती इंडस्ट्री में अब डेटा डिजाइन और डेवलपमेंट में इसकी बहुत डिमांड है।

करिअर में कोडिंग के फायदे

फ्रीलांस वेबसाइट अपवर्क के मुताबिक फ्रीलांस, सी++ प्रोग्रामर्स प्रति घंटा 55 डॉलर, एसक्यूएल डेटाबेस डेवलपर्स 54 डॉलर, पायथन डेवलपर्स 53 डॉलप और सी डेवलपर्स 52 डॉलर तक कमा सकते हैं। जहां तक सबसे ज्यादा लोकप्रिय प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की बात है, तो सितंबर 2020 के लिए TIOBE इंडेक्स के मुताबिक सी, जावा और पायथन इसमें शामिल है। यहां यह समझना जरूरी है कि कोडिंग करिअर के लिए क्यों फायदेमंद है और इसे कैसे सीखा जा सकता है?

कई अपॉर्चुनिटीज के साथ अच्छी सैलरी के अवसर भी

प्रोग्रामिंग की मांग पूरी दुनिया में है। कोडिंग सीखकर आप इस मांग का फायदा उठा सकते हैं और फ्रीलांसर से लेकर कंपनीज में फुल टाइम प्रोफेशनल्स के तौर पर काम कर सकते हैं। साथ ही कुछ साइट प्रोजेक्ट और स्टार्टअप के लिए भी कोडिंग स्किल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रोग्रामर्स की सैलरी भी काफी आकर्षक होती है, क्योंकि यह क्रिटिकल थिंकिंग और सिचुएशन एनालिसिस जैसी स्किन काम में लेते हैं। ग्लासडोर के मुताबिक ( 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक) प्रोग्रामर की राष्ट्रीय औसत आय 3,98,241 रुपए सालाना है।

घर से ही कर सकते हैं आप कोडिंग सीखने की शुरुआत

  • बूटकैंप्स- यह बिगनर्स के साथ ही ऐसे एक्सपर्ट के लिए भी नॉलेज का एक बेहतरीन सोर्स है, जो डाटा साइंस, मशीन लर्निंग, वेब डेवलपमेंट आदि के कोर्स से कोडिंग सीखना चाहते हैं। कुछ बूटकैंप्स प्री रिकॉर्डेड या शेड्यूल्ड क्लासेस से आपको अपनी पेस पर सीखने का मौका देते हैं।
  • कोडिंग बुक्स- आप ट्यूटोरियल्स या ट्रायल एंड एरर मेथड से तो कोडिंग सीख ही सकते हैं। कुछ बहुत अच्छी बुक्स भी उपलब्ध है, जो आपके लिए मददगार हो सकती है।
  • वीडियो ट्यूटोरियल्स- यहां प्रोग्रामिंग के बेसिक कॉन्सेप्ट्स को विस्तार से समझाया जाता है। स्टेप्स को समझाने के लिए ग्रैफिक्स की मदद भी ली जाती है।
  • कोडिंग गेम- इनमें वेरिएबल्स और लूप्स से लेकर एसक्यूएल, सी++, जावास्क्रिप्ट से जुड़े गेम बहुत ही आसानी से मिल जाएंगे।
  • स्टेम टॉयज- स्टेम यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स की बहुत डिमांड है। स्टेम टॉयज कई सीमाओं और स्टीरियोटाइप्स को तोड़ते हैं। जैसे की लड़कियां साइंटिस्ट नहीं बन सकती या मैथ्स और क्रिएटिविटी का कोई कनेक्शन नहीं है।

प्रॉब्लम सॉल्विंग और इंटरपर्सनल स्किल्स का होता है विकास

कोडिंग आपकी टेक्निकल स्किल्स ही नहीं सॉफ्ट स्किल्स में भी सुधार करती है। कोडिंग के दौरान जब आप स्मार्ट लोगों के साथ कोलैबोरेट करके कुछ नया और उपयोगी क्रिएट करते हैं, तो इंटरपर्सनल स्किल आपके अंदर अपने आप विकसित होने लगती है। इसी तरह प्रोग्रामिंग आपको प्रॉब्लम को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटना और फिर उनके सॉल्यूशंस को ढूंढना सिखाती है। इस तरह आपकी प्रॉब्लम सॉल्विंग और लॉजिकल कैपेसिटी विकसित होती है। आप कंप्यूटर टेक्नोलॉजी की मदद से लोगों की समस्याएं भी सॉल्व कर पाते हैं।

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