स्‍टील इंडस्‍ट्री झेल रही है लौह अयस्क की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी की मार

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अरिन्दम मुखर्जी

गुजरे करीब छह महीने के दौरान इस्पात उद्योग (Steel Industry) ने भारी समस्याएं झेली हैं. कच्चे माल (Raw Material) में लौह अयस्क की कीमतें लगातार बढ़ती रही हैं. इससे उत्पादन की लागत (Production Cost) बढ़ गई है और लोहे के तैयार उत्पादों की कीमतों में बहुत ज्‍यादा वृद्धि हुई है. बीते चार महीनों में लौह अयस्क की कीमत (Iron Ore Prices) में तकरीबन 120 फीसदी की वृद्धि हुई है. इस दौरान भारत में खनिज पदार्थों की कीमत पर नियंत्रण रखने वाले राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) ने लौह अयस्कों की कीमत में चार बार बढ़ोतरी की है.

लौह अयस्क की कीमतें 14 जनवरी 2021 को बढ़कर 10 साल के सबसे ऊंचे स्‍तर पर पहुंच गईं. इस्पात उद्योग को झटके अभी लगते रहेंगे. आने वाले समय में लौह अयस्क की कीमत में वृद्धि से कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है. इस वजह से इस्पात की कीमतें लगातार बढ़ती रहेंगी. गुजरे तीन महीनों में इस्पात निर्माताओं ने कीमतें तीन बार बढ़ाई हैं. छह महीने में इस्पात की कीमत 55 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी है. इस्पात निर्माताओं का कहना है कि अगली दो तिमाही तक उन्हें कीमतें बढ़ने की आशंका है. माना जा रहा है कि इससे स्‍टील का इस्‍तेमाल करने वाले दूसरे उद्योगों पर भी बुरा असर होगा. इस समय हॉटरोल्ड क्वायल की कीमत 55,000 रुपये प्रति टन हो गई है.

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सीमा शुल्‍क मानकीकरण से कम होंगे कुछ प्रोडक्‍ट्स के दाम

सरकार से उम्मीद थी कि बजट 2021-22 में इस पर ठोस कदम उठाया जाएगा, लेकिन सीमा शुल्क के मानकीकरण के अलावा कुछ नहीं किया गया. इससे इस्पात के कुछ उत्पादों की कीमतें कम होंगी और दूसरे उद्योग को सहायता मिल सकेगी. हालांकि, इस्पात निर्माताओं के लिए इसमें कुछ नहीं है. उनके लिए बस इतनी सी राहत है कि कीमतें कम होने से मांग में इजाफा हो सकता है. वहीं, लौह अयस्क की बढ़ती कीमतों के अलावा इस्पात उद्योग इसकी कमी का भी सामना कर रहा है. उत्पादन बाधित रहने के कारण ओडिशा की लौह खदानों से आउटपुट कम हुआ है.

अभी और हो सकती है लौह अयस्‍क की कीमतों में वृद्धि
ओडिशा में 2020 के शुरुआती छह महीनों में हुआ उत्पादन साल 2019 की तुलना में 27.86 मिलियन टन कम रहा था. इस वित्त वर्ष में लौह अयस्क की 28.56 मिलियन टन कमी है. विशेषज्ञों का मानना है कुछ महीनों में लौह अयस्क की कीमत बढ़ सकती है क्योंकि ओडिशा की लौह अयस्क खदानों में उत्पादन शुरू नहीं हुआ है. इस्पात उद्योग की प्रतिनिधि संस्था इंडियन स्टील एसोसिएशन (ISA) के डिप्‍टी सेक्रेट्री जनरल अर्नब हाजरा ने कहा, ‘इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि लौह अयस्क की कमी है. इस्‍पात उद्योग से लौह अयस्क की मांग अप्रैल-अक्टूबर 2020 की अवधि में 86.94 मिलियन टन थी.

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लौह अयस्‍क की उपलब्‍धता जरूरत के मुकाबले कम

स्टील मिंट के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अक्टूबर 2020 के दौरान भारत में कुल 92.09 मिलियन टन लौह अयस्क का उत्पादन हुआ था. भारत ने अप्रैल से अक्टूबर 2020 के दौरान 24.74 मिलियन टन लौह अयस्क फाइन्स/लंम्प्स और 9.31 मिलियन टन पेलेट का निर्यात किया. दूसरे शब्‍दों में समझें तो कुल 34.05 मिलियन टन लौह अयस्क का निर्यात कर दिया गया. इसके मुकाबले भारत ने इस अवधि में सिर्फ 0.34 मिलियन टन लौह अयस्क का आयात किया. साफ है कि भारत में लौह अयस्क की उपलब्धता जरूरत के मुकाबले बहुत कम है.

आंकड़े मिलियन टन में (एमटी)
लौह अयस्क                         अप्रैल-अक्तूबर 2020

उत्पादन                               92.09

निर्यात                                  34.05

आयात                                   0.34

देश में शुद्ध उपलब्धता           58.38

आवश्यकता                         86.94

कमी                                    28.56
(स्रोत: स्टीलमिन्ट और आईएसए)

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2020 की शुरुआत में 31 फीसदी कम रहा लौह अयस्‍क उत्‍पादन

अगर हम लौह अयस्क के उत्पादन के मामले में 2020 और 2019 के शुरू के छह महीनों की तुलना करें तो 31.8 फीसदी की कमी रही है. लौह अयस्क का उत्पादन करने वाले सभी राज्यों में इसका उत्पादन कम रहा है, लेकिन ओडिशा में कुछ ज्‍यादा ही कमी रही है. बता दें कि देश की जरूरत का 50 फीसदी से ज्यादा लौह अयस्क का उत्पादन ओडिशा में ही होता है. भारत में 2019-20 के दौरान 245 मिलियन टन लौह अयस्क का उत्पादन हुआ. इसमें ओडिशा का हिस्सा 145 मिलियन टन था, जो 59 प्रतिशत है. इसके अलावा कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी लौह अयस्क के उत्पादन में कमी आई है.

(Disclaimer: लेखक अरिन्दम मुखर्जी पूर्व पत्रकार हैं. लेख उनके निजी विचार हैं.)



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