सपनों के घर की EMI चुकाएं या किराये के घर में रहें? जानिए आपके लिए क्या है बेहतर विकल्प

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नई दिल्ली. घर का किराया (Rent) और घर की मासिक किस्त (EMI) देना दोनों विकल्पों में बड़ा अंतर है. पहले विकल्प में आप किराए के घर में सिर्फ पैसा दे रहे हैं लेकिन दूसरे विकल्प में आप पैसा चुकाने के साथ अपने खुद के घर में रह रहे हैं या फिर योजना के तहत भविष्य में रहने वाले हैं. कोरोना वायरस (Coronavirus) ने सुरक्षा के लिहाज से लोगों में खुद का घर खरीदने की होड़ मचा दी है. लेकिन किसी के लिए भी कब-कैसे और किस समय पर घर खरीदना है, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है. यह खरीदार की वित्तीय स्थिति पर भी निर्भर करता है. आइए जानते हैं कि खुद के घर के लिए मासिक किस्त देना या किराये के घर में रहना, कौन सा विकल्प ज्यादा बेहतर है.

कम ब्याज दर का फायदा
खुद का घर खरीदना हर इंसान का एक बड़ा सपना होता है. बता दें कि पिछले छह महीने से कोरोनावायरस के डर से घर से काम कर रहे नौजवानों में खुद का घर खरीदने की चाह बढ़ी है. NoBroker के आंकड़ों के मुताबिक, 65 फीसदी कामकाजी किराएदार अगले तीन महीनों में अपना खुद का मकान खरीदने वाले हैं. ब्याज दरों में कमी इसका एक बड़ा कारण है. आरबीआई द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में कटौती के बाद होम लोन की दरों में भी बड़ी गिरावट आई है.

कोरोनावायरस से बदला लोगों का नजरिया दूसरा यह है कि डेवलेपर्स भी घरों को बहुत ही कम दामों में बेच रहे हैं. ऐसे में घर की इच्छा रखने वालों के पास अपने बजट के अनुसार निर्माणाधीन परियोजनाओं के चक्कर में पड़ने के बजाय सीधे तौर पर घर में जाकर रहने का बड़ा सुनहरा मौका है. जानकार बताते हैं कि कोरोनावायरस के कारण लोगों के घर खरीदने की सोच में बड़ा बदलाव आया है. पहले वे इसके लिए अधिक सोच में पड़ जाते थे. लेकिन अब मौजूदा हालात को देखते हुए वे इसकी जरुरत महसूस कर रहे हैं.

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प्रधानमंत्री आवास योजना में विस्तार
एक और कारक जो इस समय लोगों को घर खरीदने के लिए मजबूर करता है वो है प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की समय सीमा में विस्तार. सरकार ने इस योजना का लाभ उठाने के लिए इसकी समयाविधि में एक साल की बढ़ोतरी कर दी है. इसका सीधा मतलब है कि जिनकी सालाना आय 6 से 18 लाख रुपये है वे 31 मार्च 2021 तक इसमें 2.38 लाख रुपये तक की ब्याज सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं. पहली बार घर खरीदने वालों के लिए यह अच्छी खबर है.

आमतौर पर घर की ईएमआई की रकम मासिक किराये की तुलना में ज्यादा होती है. खुद के घर के लिए 20 फीसदी डाउन पेमेंट और 80 फीसदी की लोन लेने की स्थिति में बैंक लोन से ज्यादा ब्याज का भुगतान करना पड़ता है. इसलिए किराये के घर या अपार्टमेंट में रहना घर की मासिक किस्त जमा करने की तुलना में अधिक आरामदायक होता है.

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ईएमआई और किराये के गणित को समझें
जब आप लोन पर घर खरीदते हैं तो आप पर उसके चुकाने की भी जिम्मेदारी आ जाती है. इसे बंगलुरू में एक रियल एस्टेट प्रोपर्टी के माध्यम से समझाने की कोशिश करते हैं. उन्होंने कहा कि मान लीजिए वर्तमान में संपत्ति का बाजार का मूल्य 50 लाख रुपये है. कोई इस संपत्ति को खरीदने या किराए पर लेने का निर्णय कैसे लेगा.

पहले किराये के नजरिए से समझते हैं. यदि कोई इस संपत्ति को किराए पर लेना चाहता है तो वह 12 से 14 हजार रुपये प्रति महीने चुकाएगा. यह लागत 11 महीने बाद बढ़ जाएगी. इसलिए हो सकता है कि उसे किराये को बनाए रखने या हर साल लगभग 5-10 फीसदी की बढ़ोतरी से बचने के लिए हर साल एक अलग स्थान पर शिफ्ट होना पड़ सकता है. हालांकि उसके वेतन में भी वृद्धि होगी लेकिन मुद्रास्फीति उसे हर साल किराए का घर बदलने पर मजबूर करेगी.

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घर खरीदने के नजरिए से देखने पर पता चलता है कि जब आप होम लोन (20 फीसदी डाउन पेमेंट- 80 फीसदी लोन) पर एक घर खरीदते हैं तो इसमें आपको 20 सालों के लिए 7.25 फीसदी की ब्याज दर पर हर महीने 32 हजार रुपये की मासिक किस्त चुकानी होती है और यदि आप 50 फीसदी डाउन पेमेंट चुकाते हैं तो आपको इसमें 20 हजार रुपये मासिक किस्त चुकानी होती है.



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