संविधान से पीएम मोदी की निष्ठा नई नहीं, बतौर मुख्यमंत्री भी उन्होने हमेशा संविधान को सर्वोपरी रखा

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 2010 में संविधान के 60 साल पूरे होने पर गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेन्द्र मोदी ने गुजरात गौरव यात्रा निकाली थी.

2010 में संविधान के 60 साल पूरे होने पर गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेन्द्र मोदी ने गुजरात गौरव यात्रा निकाली थी.

Constitution Day: पीएम ने देश की जनता को बधाई देते हुए उम्मीद भी जतायी की संविधान दिवस लोगों को संविधान के बारे में जानने के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहित करेगा.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 26, 2020, 8:24 PM IST

नई दिल्ली. पीएम मोदी (PM Modi) ने संविधान दिवस (Constitution Day) के मौके पर देश भर के पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन को संबोधित किया. देश भर में संविधान दिवस मनाने की शुरुआत भी पीएम मोदी ने 2015 मे की थी. फिर 2019 में ये दिन मनाने के लिए संसद का एक विशेष संयुक्त सत्र भी बुलाया गया. पीएम मोदी को मुख्यमंत्री काल से देखते रहने वाले बताते हैं कि संविधान से पीएम मोदी का आदर और लगाव और साथ ही संविधान के प्रति उनकी भक्ति कोई नयी बात नहीं है. पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर कहा कि ये संविधान बनाने वालों और संविधान के प्रति अपनी निष्ठा प्रकट करने के लिए इस संविधान दिवस की शुरुआत की गयी थी.

ऐसा नहीं है कि संविधान के प्रति निष्ठा पीएम बनने के बाद जागी है. 2010 में संविधान के 60 साल पूरे होने पर गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेन्द्र मोदी ने गुजरात गौरव यात्रा निकाली थी. साथ ही सुरेन्द्रनगर जिले में एक ऐसा जुलुस निकाला था जिसमें एक हाथी के उपर संविधान रख कर शङर में शान के साथ घुमाया गया था. पीएम मोदी ने ट्वीट कर के बताया कि हाथी पर संविधान रख कर एक बड़ा जलसा निकालना एक अनुठी बात थी और मै खुद पैदल इस जुलुस के साथ चला था.

संविधान के प्रति पीएम मोदी की निष्ठा कई बार देखी गई है.

इतिहासकार बताते हैं कि ये एक अद्भुत घटना थी और ऐसा उदाहरण गुजरात में कई सौ सालों पहले गुजरात में देखने को मिला थ. संविधान को मिले ऐसे सम्मान की तुलना ऐसे कई साल पहले राजा सिद्धराज के शासन काल से की. राजा सिद्धराज ने एक ऐसा ही जुलुस निकाला था जिसमें हाथी के उपर संत हेमचंद्राचार्य की लिखी किताब रखी थी. संत हेमचंद्रचार्य ने व्याकरण पर एख बृहत ग्रंथ लिखा था जिसका नाम था सिद्धाहेमच्रद्र शब्दानुशासन. इस किताब मे एक लाख पच्चीस लाख श्लोक थे. और इसमें प्रकृत और अपभ्रंश भाषा का भी इस्तेमाल हुआ है. इसी पुस्तक को हाथी के उपर रख कर एक बड़ा जुलुस बडे धूम धाम से पूरे पाटन शहर में घुमा था.पीएम ने देश की जनता को बधाई देते हुए उम्मीद भी जतायी की संविधान दिवस लोगों को संविधान के बारे में जानने के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहित करेगा.



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