वैश्विक स्तर पर आवासीय प्रॉपर्टी की सुधार की रैंकिंग में 7 पायदान फिसला भारत, 2.4 फीसदी तक सस्ते हुए घर

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नई दिल्ली. साल-दर-साल के आधार पर जुलाई से सितंबर तिमाही के दौरान भारत में आवासीय प्रॉपर्टी (Residential Property) की कीमत 2.4 फीसदी तक लुढ़की है. इस गिरावट के बाद अब आवासीय प्रॉपर्टी के दाम में इजाफा होने वाले इंडेक्स में भारत 7 पायदान नीचे खिसककर 54वें स्थान पर आ गया है. प्रॉपर्टी कंसल्टेंट फर्म नाइट फ्रैंक (Knight Frank) ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी है. इस रैंकिंग में 56 देश शामिल हैं, जिन्हें आवासीय रियल एस्टेट की कीमतों में सुधार के आधार पर रैंकिंग दी जाती है. हालांकि, जून तिमाही से तुलना करने पर भारत की रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

पहले 47वें पायदान पर था भारत
नाइट फ्रैंक ने ‘ग्लोबल हाउस प्राइस इंडेक्स Q3 2020‘ नाम से एक रिसर्च रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर आवसीय घरों की कीमतों के आधार पर रैंकिंग के मामले में भारत 47वें पायदान से 7 पायदान नीचे खिसक गया है. यह चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही की रैंकिंग है. भारत में तीसरी तिमाही के दौरान साल-दर-साल आधार पर घरों की कीमतों में 2.4 फीसदी की गिरावट आई है.

तुर्की में आवासीय प्रॉपर्टी 27.3 फीसदी तक महंगी हुईसाल-दर-साल के आधार पर कीमतों में 27.3 फीसदी की बढ़त के साथ तुर्की इस रैंकिंग में सबसे टॉप पर है. इसके बाद दूसरे पायदान पर न्यूजीलैंड हैं, जहां घरों की कीमतों में 15.4 फीसदी का इजाफा हुआ है. इस इंडेक्स में तीसरे पायदान पर लग्जमबर्ग है, जहां घरों की कीमतें 13.4 फीसदी तक बढ़ी हैं.

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इस इंडेक्स में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला देश मोरक्को है. यहां पिछले साल की तुलना में इस साल सितंबर तिमाही के दौरान आवसीय घरों की कीमतें 3.3 फीसदी तक कम हुई हैं.

कोरोना वायरस महामारी के बीच भारत में क्यों सस्ते हुए घर?

नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा, ‘महामारी से अर्थव्यवस्था के स्तर पर चुनौतियों का सामना करने के लिए रियल एस्टेट डेवलपर्स इनोवेटिव मार्केटिंग रणनीति अपनाई है, जिसमें घर खरीदारों को आकर्षित करने के लिए वित्तीय फायदा, डिस्काउंट और आसान पेमेंट का विकल्प दिया जा रहा है.‘ उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर अभी भी दबाव की स्थिति में है, लेकिन सितंबर तिमाही के दौरान घरों की बिक्री बढ़ी है.

2021 की पहली तिमाही तक जारी रह सकता है यह ट्रेंड
होम लोन 7 फीसदी से नीचे आने के साथ कई दशकों में न्यूनतम स्तर पर है. इसके अलावा आवासीय घरों की कीमतों में गिरावट, अग्रेसिव मार्केटिंग और तरह-तरह के डिस्काउंट की वजह से तीसरी तिमाही में सेल्स बढ़ी है. बैजल ने कहा कि आगे देखें तो इकोनॉमी का फंडामेटल अभी भी मजबूत है और इसमें उम्मीद से बेहतर रिकवरी देखने को मिल रही है. ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि घर खरीदारी का ट्रेंड अभी भी मजबूत रहेगा. यह सिलसिला 2021 की पहली तिमाही तक जारी रह सकता है.

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इस इंडेक्स में शामिल होने वाले सभी 56 देशों में आवासीय घरों की औसत कीमत सालाना आधार पर 4.5 फीसदी तक बढ़ी है.



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