कम उम्र में बच्चों को होने वाली बीमारी है रूमैटिक फीवर, जानें लक्षण, कारण और इलाज

0
19


रूमैटिक फीवर में तेज बुखार आने के साथ गले में खराश होने लगती है.

रूमैटिक फीवर में तेज बुखार आने के साथ गले में खराश होने लगती है.

बच्चों (Children) पर मौसमी संक्रमण (Seasonal Infection) का भी असर अधिक होता है, जिसके कारण बच्चों को सर्दी खांसी (Cough and Cold) और बुखार (Fever) जैसी समस्या हो सकती है.



  • Last Updated:
    December 18, 2020, 6:28 AM IST

बच्चों (Children) के विकासशील अवस्था में होने के कारण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) थोड़ी कमजोर होती है, जिस कारण वे  संक्रमण के प्रति संवेदनशील होते हैं. बच्चों पर मौसमी संक्रमण का भी असर अधिक होता है, जिसके कारण बच्चों को सर्दी खांसी और बुखार जैसी समस्या हो सकती है यह ऐसी दिक्कतें हैं, जो कुछ ही दिनों में ठीक भी हो जाती हैं, लेकिन कुछ संक्रमण बच्चों को लंबे समय तक प्रभावित कर सकते हैं, जो उनके लिए घातक हो सकते हैं. इन्हीं में से एक है रूमैटिक फीवर, जो बच्चों के हृदय पर बुरा असर डालता है. आइए जानते हैं कि रूमैटिक फीवर क्या है और इसे कैसे पहचाना जा सकता है.

क्या होता है रूमैटिक फीवर

myUpchar के अनुसार, रूमैटिक फीवर 5-14 वर्ष के बच्चों में होता है. इस रोग में बच्चों के दिल का स्वास्थ्य खराब हो जाता है. स्ट्रेप्टोकोकल बैक्टीरिया की वजह से होने वाला यह फीवर दिल की धमनियों को क्षतिग्रस्त कर देता है. इससे बुखार आने लगता है. इस फीवर के कारण दिल और दिमाग से जुड़ीं सभी कोशिकाएं प्रभावित होती हैं और इम्युनिटी सिस्टम कमजोर हो जाता है. इस बुखार की वजह से दिल का दौरा भी पड़ने का खतरा हो सकता है.रूमैटिक फीवर के लक्षण

रूमैटिक फीवर में तेज बुखार आने के साथ गले में खराश होने लगती है. इसके अतिरिक्त सांस फूलना, लिम्फेनोड का फूलना, जोड़ों में दर्द और सूजन होना, उल्टी आना, नाक से खून आने के साथ छाती में दर्द और हाथ पैर में कंपकंपी होना आदि लक्षण दिखाई दे सकते हैं.

ध्यान रखें यह सावधानियां

myUpchar के अनुसार, स्ट्रैप्टोकोकल बैक्टीरिया, जो रूमैटिक फीवर का कारण होता है, यह आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है, इसलिए भीड़भाड़ वाले स्थान पर जाने से बचना चाहिए. यह संक्रमण किसी दूसरे को न फैले, इसलिए समय समय पर हाथ धोना चाहिए. संक्रमित रोगी से दूरी बनाकर रखना चाहिए. इस बैक्टीरिया से संक्रमित होने के बाद दांतों का बहुत ध्यान रखना चाहिए. यह बैक्टीरिया खून में जाकर हृदय को नुकसान पहुंचाने लगता है, इसलिए दांतों को साफ करते रहना जरूरी है. साथ ही शरीर के अन्य अंगों की भी साफ-सफाई का बेहद ख्याल रखना चाहिए, ताकि यह बैक्टीरिया फैल न सके.

क्या है इलाज

रूमैटिक फीवर होने पर डॉक्टर स्ट्रैप्टोकोकल बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए कुछ एंटी बायोटिक्स देते हैं. इसके उपचार की प्रक्रिया लंबे समय तक चल सकती है, जिसमें 5-10 साल लग सकते हैं. यह इसलिए किया जाता है ताकि यह संक्रमण रोगी को फिर से अपनी चपेट में न ले. खासतौर पर उन रोगियों के उपचार में ज्यादा समय लग सकता है, जिनके हृदय में सूजन हो. सूजन को कम करने के लिए कुछ एंटी इन्फ्लेमेटरी दवाएं दी जाती हैं और यदि यह दवाएं भी सूजन कम नहीं करती है तो रोगी को कॉर्टिकोस्टेराइड दवाएं दी जाती हैं, जिससे सूजन कम हो जाती है.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, रूमैटिक फीवर पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।



LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here