आज से बंद हो गया 94 साल पुराना बैंक, ग्राहकों और निवेशकों के लिए हुए बड़े बदलाव

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नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने नकदी संकट (Cash Crunch) से जूझ रहे लक्ष्‍मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) पर पहले कई तरह की पाबंदियां लगाईं और इसके तुरंत बाद उसके डीबीएस बैंक में विलय (Merger in DBS Bank) की घोषणा कर दी. 94 साल पुराने लक्ष्मी विलास बैंक का नाम आज खत्म हो जाएगा. सिंगापुर के सबसे बड़े DBS बैंक के साथ इसका मर्जर हो जाएगा. फाइनल स्कीम के तहत लक्ष्मी विलास बैंक का अस्तित्व 27 नंवबर यानी आज खत्म हो जाएगा और इसके शेयर एक्सचेंज से डीलिस्ट हो जाएंगे.

आइए आज हम आपको इस बैंक के बारे में पूरी डिटेल बताते हैं कि आखिर कैसे ये संकट शुरू हुई और लाखों ग्राहकों का इस पर क्या असर पड़ेगा-

20 लाख ग्राहकों पर होगा असर
एलवीएस का नाम बदलने के बाद बैंक के ग्राहकों (Bank Customers) और कर्मचारियों (Bank Employees) का क्‍या होगा. कैबिनेट में लिए गए फैसलों को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javadekar) ने बताया कि बैंक के 20 लाख ग्राहकों को राहत मिलेगी. वे शुक्रवार से अपने खातों को डीबीएस बैंक इंडिया के ग्राहकों के तौर पर ऑपरेट कर सकेंगे. बेलआउट पैकेज के तहत लक्ष्मी विलास बैंक के जमाकर्ताओं को उनका पूरा पैसा मिल जाएगा. अगर वे बैंक में अपना पैसा रखना चाहें तो भी सुरक्षित रहेगा.यह भी पढ़ें: क्या वाकई में मुफ्त अनाज वितरण योजना 30 नवंबर को हो जाएगी समाप्त? जानें सबकुछ

पूरी तरह सुरक्षित हैं पैसे
आपको बता दें बैंक ने अपने ग्राहकों को भरोसा दिया था कि मौजूदा संकट का उनकी जमाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा. बैंक ने कहा था कि 262 फीसदी के तरलता सुरक्षा अनुपात (LCR) के साथ जमाकर्ता, बॉन्डधारक, खाताधारक और लेनदारों की संपत्ति पूरी तरह सुरक्षित है.

कैसे शुरू हुआ संकट?
पिछले कुछ साल में जब किसी बैंक के ग्रोथ को उसके लोन बुक से जोड़कर देखा जाने लगा तो इसका बुरा दौर शुरू हुआ. 4-5 साल पहले लक्ष्मी विलास बैंक ने रिटेल, MSME और SME को बड़े लोन बांटना शुरू कर दिया था. बड़े लोन से बैंक का लोन बुक तो बड़ा हो गया लेकिन यही इसकी मुसीबत बन गया.

अर्थव्यवस्था में तेजी ना आने की वजह से बैंक का लोन NPA बन गया. वहीं, एनालिस्ट्स के अनुमान के मुताबिक, बैंक का 3000-4000 करोड़ रुपए का कॉरपोरेट लोन बैड लोन है. NPA बहुत ज्यादा बढ़ने की वजह से सितंबर 2019 में RBI को प्रॉम्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) फ्रेमवर्क के तहत कई कड़े कदम उठाने पड़े. 2018-19 में बैंक को 894 करोड़ रुपए का लॉस हुआ था.

कितना हो रहा नुकसान?
बता दें पिछली 10 तिमाहियों से बैंक को लगातार नुकसान हो रहा था. सितंबर को खत्म तिमाही में टैक्स पेमेंट के बाद नेट लॉस 396.99 करोड़ रुपए का था. एक साल पहले इसी तिमाही में बैंक का नेट लॉस 357.18 करोड़ रुपए था.

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94 साल पुराना बैंक
बता दें, करीब 94 साल पुराने लक्ष्मी विलास बैंक (एलवीबी) के मैनेजमेंट में उथल-पुथल का दौर काफी समय से चल रहा था. बता दें कि बैंक पिछले कुछ साल से पूंजी जुटाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन सफल नहीं हुआ. गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस कंपनी में विलय के प्रस्ताव को आरबीआई ने 2019 में खारिज कर दिया था.



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