अगर भारत ने गांजे को कानूनी मान्‍यता दी, तो चीन को इस लड़ाई में भी दे सकता है मात

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बॉलीवुड अभिनेत्री और दिवंगत बॉलीवुड स्टार सुशांत सिंह राजपूत की गर्लफ्रेंड रही रिया चक्रवर्ती Drugs case के कारण सुर्खियों में रही हैं. उन्हें जेल भी जाना पड़ा. रिया चक्रवर्ती ने शायद ही कभी हैरी अनस्लिंगर के बारे में सुना होगा और उनसे मुलाकात का तो सवाल ही नहीं उठता. दरअसल, हैरी 1930 के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका के फेडरल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स के आयुक्त के रूप में अपने कार्यकाल के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने देश के नस्लवादी युद्ध का नेतृत्व किया था, उनका मानना था कि गांजा समाज पर कठोराघात करने, अमेरिका के नैतिक ताने-बाने को नष्ट करने और लाभकारी रोजगार के लिए अमेरिकियों की क्षमता को कम करने का कारण बन सकता है.

उन्होंने गांजे को कभी लाभप्रद नहीं माना. जबकि तथ्‍य इससे कहीं उलट हैं. उन्‍होंने गांजे को केवल प्रतिबंधित करने के लिए ही काम किया. ऐसा ही कुछ अफीम के साथ हुआ था. कुछ दशक पहले इसे अमेरिका के जीवन के लिए खतरा कहा गया था. इसे अप्रवासी, मुख्‍य रूप से मैक्सिकन द्वारा उपयोग में लाए जाने के कारण खतरनाक बताया गया और विश्‍व मंच पर भी इसे प्रतिबंधित करने को दबाव बनाया गया. संयुक्त राष्ट्र के 1961 के सम्मेलन में नारकोटिक ड्रग्स पर चर्चा हुई और उसके बाद दुनिया को ड्रग पॉलिसी का दस्तावेज मिला. नशीले पौधों के वर्गीकरण का काम शुरू हुआ और पश्चिमी दुनिया ने कैनाबिस को सबसे खतरनाक ड्रग्स हीरोइन जैसा माना. ऐसे समय जब पूरी दुनिया नशीले पौधों के प्रतिबंध को लेकर मोर्चा खोले हुए थी, तब भारत ने अपना पक्ष दुनिया को बताया, जिससे इसे औद्योगिक और बागवानी उपयोग के लिए क्‍लॉज डाला गया था जो एक अपवाद बना.

पिछले साल नवंबर में जब अमेरिका में चुनाव हो रहे थे और राष्ट्रपति पद को लेकर मतदाताओं में जोरदार उत्साह देखा जा रहा था तब किसी का ध्यान कैनाबिस के व्यापार को लेकर सामने आ रहे समर्थन पर नहीं जा पाया. राष्ट्रपति पद पर बिडेन जीत गए, वहीं कई राज्यों ने कैनाबिस पर अपने कानून में सुधार किया. इसके एक सप्ताह बाद संयुक्त राष्ट्र ने भी नशीली दवाओं के निषेध को लेकर एक नया कदम उठाया है. उन्होंने कैनाबिस को उच्च नियत अनुसूची 4:00 से अलग करते हुए शेड्यूल अनुसूची 1:00 पदार्थ में फिर से रखने के लिए अभिमत मांगा है. एक अनुमान के मुताबिक इसकी फसल में बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं. पूरे विश्व में मनोरंजन, चिकित्सकीय और औद्योगिक कैनाबिस प्रोडक्ट का मार्केट 2027 तक करीब 90 अरब अमेरिकी डॉलर का हो जाएगा.

चीन आगे का खिलाड़ीइसमें कोई आश्चर्य नहीं कि वैश्विक गांजा भांग के बाजार में चीन एक अग्रणी खिलाड़ी है और फसल के व्यवसायिक दायरे को देखते हुए उसे पूरी दुनिया में व्यापार करने का अवसर मिला है. इस पौधे को चीन में कई सालों से देखा जा रहा है. चीन सरकार इसके गुणों को लेकर सावधान बनी रही. ब्रिटिश शासन के दौरान अफीम की खेती को लेकर उसके अनुभव भी ठीक नहीं रहे हैं इसलिए कैनाबिस को उगाने उसके अवैध कब्जे पर बहुत बड़ा जुर्माना किया जाता रहा है. चीन ने पिछले महीने ही संयुक्त राष्ट्र में गांजा के पुर्नवर्गीकरण को लेकर के विरोध में मतदान किया.

चीन ने इसके औद्योगिक और औषधि महत्व को पहचाना है. चीन ने अपने यूनान प्रांत में गांजे की लाइसेंसी खेती को 2004 में अनुमति दी थी. 2017 में चीन के ही हेईलोंगजियांग प्रांत ने एक मुकदमा जीतने के बाद करीब 1 साल में मादक पदार्थों की इतना उत्पादन किया जो यूरोप और कनाडाई क्षेत्रों के संयुक्त उत्पादन का एक तिहाई था. बड़ी उपज और उच्च उपज की क्षमता वाले विकसित बीजों ने इन क्षेत्रों को अधिक उत्पादन करने में सक्षम बनाया है. अब क्षेत्र में विश्व का करीब आधा औद्योगिक गांजा पैदा किया जाता है. इस बाजार में चीन के दबदबे को समझने के लिए यह जानना होगा कि 600 प्रमुख कैनाबिस संबंधी पेटेंट में से आधे चीन के कब्जे में है जिनके लिए वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइजेशन में पेटेंट फाइल किया गया है.

महत्वपूर्ण बात यह है कि चीन की तरह ही भारत ने कैनाबिस को लेकर संयुक्त राष्ट्र में पिछले महीने ही अपना मत दिया है. घरेलू उपयोग को लेकर कानून कठोर बने रहेंगे, लेकिन भारत का यह कदम बदलाव की दिशा में उत्प्रेरक का काम कर सकता है.

यदि चीन और भारत से प्रेरित होकर कुछ अन्य देश ऐसा फैसला लेते हैं तो भांग की क्षमता पर भरोसा करने वाले देशों के कारण इस मार्केट का रुख बदल सकता है. फिलहाल भारत के लिए यह लाभ का सौदा बन सकता है. भारत में अभी कोरोना महामारी के कारण केंद्र और राज्य सरकारें राजस्व की भारी कमी से जूझ रही है. यदि कैनाबिस प्रोडक्ट्स पर टैक्स लगाया जाता है तो केंद्र और राज्य दोनों के लिए यह अकेला खजाने को भरने का काम कर सकता है.

एक रिसर्च के मुताबिक यदि सिगरेट की तरह ही कैनाबिस प्रोडक्ट्स पर टैक्स लगाया जाए तो भारी कमाई हो सकती है. 2018 के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली से 31.45 मिलियन यूएस डॉलर और मुंबई से 27.78 मिलियन यूएस डॉलर की कमाई हुई थी.

क्या भारत में कोई प्रभाव हो सकता है
भारत का गांजा के साथ लंबा इतिहास है. कई 100 सालों तक यह भारतीय उपमहाद्वीप में आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है. भारत ने 1961 में हुए संयुक्त राष्ट्र के एकल अधिवेशन का अनुपालन करते हुए 1985 में नारकोटिक्स ड्रग्स साइकॉट्रॉपिक सब्सटेंसस एक्ट द्वारा इसे प्रतिबंधित किया था. इसकी बागवानी और औद्योगिक उपयोग की खपत के साथ अनुमति दी गई थी लेकिन इसकी खेती करने के लिए कड़े नियम कानूनों का पालन करना होता था. व्‍यावहारिक तौर आई कठिनाइयों के कारण किसानों ने इससे दूरी बना ली.

अभी भी गांजे का मनोरंजन के लिए उपयोग करना अवैध है लेकिन इसका उपयोग बड़ी मात्रा में चोरी छुपे किया जाता है. जर्मनी की संस्था एबीसीडी के 2018 में किए अध्ययन के अनुसार प्रतिबंधित गांजे का उपयोग करने में दिल्ली और मुंबई दुनिया में तीसरे और छठवें सबसे अधिक उपभोक्ता वाले शहर थे. आंकड़ों को 2019 में एम्स द्वारा किए गए अध्ययन ने पुष्टि भी की है. इसके अनुसार 3.1 करोड़ लोग भारत में इसका उपयोग करते हैं, जबकि मात्र 10 फ़ीसदी से कम लोगों को इससे नुकसान पहुंचता है. शराब पीने वाले लोगों को यह आंकड़ा 20 फ़ीसदी का है.

भारत को मिल सकता है बड़ा लाभ
नशीले पदार्थों को लेकर यदि भारत अपने नियमों-अधिनियमों में बदलाव करता है तो उसको बहुत बड़ा फायदा हो सकता है. इस निर्णायक कार्रवाई से भारत को धन, रोजगार क्षेत्र को बढ़ावा व कर राजस्व मिलेगा. दुनिया की नजरों से देखें तो यह एक बहुत उपयुक्त समय है जब भारत ऐसा निर्णय ले सकता है.



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